अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सचिव धीर धरि कह मुदु बानी। महाराज तुम्ह पंडित ग्यानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमन्त्री धीरज धरकर कोमल वाणी बोले—महाराज! आप पण्डित और ज्ञानी हैं। हे देव! आप शूरवीर तथा उत्तम धैर्यवान् पुरुषोंमें श्रेष्ठ हैं। आपने सदा साधुओंके समाजका सेवन किया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 468 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सचिव धीर धरि कह मुदु बानी। महाराज तुम्ह पंडित ग्यानी।।
बीर सुधीर धुरंधर देवा। साधु समाजु सदा तुम्ह सेवा।।
स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 468, 468
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सचिव धीर धरि कह मुदु बानी। महाराज तुम्ह पंडित ग्यानी।।
English explanation
Gathering his composure, the minister speaks gently: Your Majesty, you are learned and wise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | Minister Sumantra |
| धीर | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | having gathered |
| कह | कहते हैं | says |
| मुदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
| महाराज | हे महाराज | Your Majesty |
| तुम्ह | आप | you |
| पंडित | विद्वान | learned |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 बीर सुधीर धुरंधर देवा। साधु समाजु सदा तुम्ह सेवा।।
English explanation
My lord, you are brave, steadfast, and capable of bearing great responsibilities; you have always served the company of holy people.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीर | वीर | brave |
| सुधीर | अत्यंत धैर्यवान | very steadfast |
| धुरंधर | बड़ी जिम्मेदारियाँ सँभालने वाले | a bearer of great responsibilities |
| देवा | हे स्वामी | O lord |
| साधु | संतों का | of holy people |
| समाजु | समुदाय | company |
| सदा | सदा | always |
| तुम्ह | आपने | you |
| सेवा | सेवा की | have served |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 468
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 468, 468
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।