अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि पुनि पूँछत मंत्रहि राऊ। प्रियतम सुअन सँदेस सुनाऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा बार-बार मन्त्रीसे पूछते हैं—मेरे प्रियतम पुत्रोंका सँदेसा सुनाओ। हे सखा! तुम तुरंत वही उपाय करो जिससे श्रीराम, लक्ष्मण और सीताको मुझे आँखों दिखा दो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 468 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि पुनि पूँछत मंत्रहि राऊ। प्रियतम सुअन सँदेस सुनाऊ।।
करहि सखा सोइ बेगि उपाऊ। रामु लखनु सिय नयन देखाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.15 · पुस्तक पृ. 468, 468
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि पुनि पूँछत मंत्रहि राऊ। प्रियतम सुअन सँदेस सुनाऊ।।
English explanation
The king repeatedly asks the minister: Tell me the message from my dearest son. (This interpretation is an AI draft.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पूँछत | पूछते हैं | asks |
| मंत्रहि | मंत्री से | of the minister |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| प्रियतम | सबसे प्रिय | dearest |
| सुअन | पुत्र राम का | of his son Rama |
| सँदेस | संदेश | message |
| सुनाऊ | सुनाओ | tell me |
2 करहि सखा सोइ बेगि उपाऊ। रामु लखनु सिय नयन देखाऊ।।
English explanation
Friend, quickly find a way to let me see Rama, Lakshmana, and Sita with my own eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहि | करो | do |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| सोइ | वही | that very |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| उपाऊ | उपाय | means |
| रामु | राम को | Rama |
| लखनु | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| सिय | सीता को | Sita |
| नयन | मेरी आँखों को | to my eyes |
| देखाऊ | दिखाओ | show |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 468
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 468, 468
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।