अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू।।
मूल पाठ
जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू।।
कपट सनेहु बढ़ाइ बहोरी। बोली बिहसि नयन मुहु मोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 366, 366
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि राजा नीतिमें निपुण हैं; परन्तु त्रियाचरित्र अथाह समुद्र है। फिर वह कपटयुक्त प्रेम बढ़ाकर (ऊपरसे प्रेम दिखाकर) नेत्र और मुँह मोड़कर हँसती हुई बोली—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 366 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू।।
English explanation
Although the king is skilled in statecraft, a woman's ways are likened here to a deep ocean, difficult to fathom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| नीति | नीति और व्यवहार-ज्ञान में | in statecraft and practical wisdom |
| निपुन | निपुण | skilled |
| नरनाहू | राजा | the king |
| नारिचरित | स्त्री का चरित्र या व्यवहार | a woman's character or ways |
| जलनिधि | समुद्र | ocean |
| अवगाहू | गहरा, जिसकी थाह कठिन हो | deep; difficult to fathom |
2 कपट सनेहु बढ़ाइ बहोरी। बोली बिहसि नयन मुहु मोरी।।
English explanation
Then, heightening her feigned affection, she smiled and spoke, turning her eyes and face aside.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपट | छलभरा | feigned; deceitful |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| बढ़ाइ | बढ़ाकर | heightening |
| बहोरी | फिर | then; again |
| बोली | उसने कहा | she said |
| बिहसि | मुस्कराकर | smiling |
| नयन | आँखें | eyes |
| मुहु | मुँह | face |
| मोरी | मोड़कर | turning aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 366
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 366, 366
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