अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई।।
मूल पाठ
ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई।।
लखहिं न भूप कपट चतुराई। कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 366, 366
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसी भारी पीड़ाको भी उसने हँसकर छिपा लिया, जैसे चोरकी स्त्री प्रकट होकर नहीं रोती (जिसमें उसका भेद न खुल जाय)। राजा उसकी कपट-चतुराईको नहीं लख रहे हैं। क्योंकि वह करोड़ों कुटिलोंकी शिरोमणि गुरु मन्थराकी पढ़ायी हुई है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 366 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई।।
English explanation
She concealed even such pain with a smile, like a thief's wife who does not weep openly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसिउ | ऐसी भी | even such |
| पीर | पीड़ा | pain |
| बिहसि | हँसकर | smiling |
| तेहि | उसने—कैकेयी ने | she—Kaikeyi |
| गोई | छिपा ली | concealed |
| चोर | चोर की | a thief's |
| नारि | स्त्री | wife |
| जिमि | जैसे | as |
| प्रगटि | खुलकर | openly |
| न | नहीं | not |
| रोई | रोती | weeps |
2 लखहिं न भूप कपट चतुराई। कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई।।
English explanation
The king does not detect her deceitful cleverness; she had been tutored by Manthara, the foremost among millions of schemers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखहिं | पहचानते हैं | discerns |
| न | नहीं | not |
| भूप | राजा | the king |
| कपट | छल | deceit |
| चतुराई | चतुराई | cleverness |
| कोटि | करोड़ों | millions |
| कुटिल | कुटिलों में | among schemers |
| मनि | शिरोमणि | the foremost jewel |
| गुरू | गुरु ने | by her tutor |
| पढ़ाई | सिखाई हुई | taught; schooled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 366
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 366, 366
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।