अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं कल ही रामको युवराज-पद दे रहा हूँ। इसलिये हे सुनयनी! तू मङ्गल-साज सज। यह सुनते ही उसका कठोर हृदय दलक उठा (फटने लगा)। मानो पका हुआ बालतोड़ (फोड़ा) छू गया हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 366 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू।।
दलकि उठेउ सुनि ह्रदउ कठोरू। जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 366, 366
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू।।
English explanation
Tomorrow I shall appoint Rama crown prince. O beautiful-eyed lady, arrange the auspicious preparations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | to Rama |
| देउँ | मैं दूँगा | I shall give |
| कालि | कल | tomorrow |
| जुबराजू | युवराज का पद | the office of crown prince |
| सजहि | सजाओ | arrange |
| सुलोचनि | हे सुंदर नेत्रों वाली | O beautiful-eyed lady |
| मंगल | मंगल का | auspicious |
| साजू | सामान और तैयारी | materials and preparations |
2 दलकि उठेउ सुनि ह्रदउ कठोरू। जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू।।
English explanation
Hearing this, her hard heart jolted with pain, as though a ripe, inflamed boil had been touched.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दलकि | दर्द से चौंककर | jolting with pain |
| उठेउ | उठा | rose; sprang up |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| ह्रदउ | हृदय | heart |
| कठोरू | कठोर | hard |
| जनु | मानो | as though |
| छुइ | छू | touched |
| गयउ | गया हो | had been |
| पाक | पका हुआ | ripe; fully inflamed |
| बरतोरू | बालतोड़ फोड़ा | a boil at a hair follicle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 366
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 366, 366
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।