अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअपने जीमें कैकेयीको सुहृद् जानकर राजा दशरथजी प्रेमसे पुलकित होकर कोमल और सुन्दर वाणीसे फिर बोले—हे भामिनि! तेरा मनचीता हो गया। नगरमें घर-घर आनन्दके बधावे बज रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 366 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी।।
भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 366, 366
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Then the king, believing Kaikeyi to be his well-wisher, spoke in gentle, lovely words, thrilled with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then; again |
| कह | कहा | said |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सुह्रद | हितैषी | well-wisher |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जानी | समझकर | considering her |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| पुलकि | पुलकित होकर | thrilled |
| मृदु | कोमल | gentle |
| मंजुल | सुंदर | lovely |
| बानी | वाणी में | in words |
2 भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा।।
English explanation
My lovely lady, what pleases your heart has come to pass; every home in the city is filled with joy and congratulations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भामिनि | हे सुंदरी | O lovely lady |
| भयउ | हो गया है | has come to pass |
| तोर | तुम्हारा | your |
| मनभावा | मन को भाने वाला | heart's desire |
| घर | घर | home |
| घर | घर में—हर घर में | after home—in every home |
| नगर | नगर में | in the city |
| अनंद | आनंद | joy |
| बधावा | बधाइयाँ और उत्सव | congratulations and celebration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 366
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 366, 366
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।