अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जथा जोगु करि बिनय प्रनामा। बिदा किए सब सानुज रामा।।
मूल पाठ
जथा जोगु करि बिनय प्रनामा। बिदा किए सब सानुज रामा।।
नारि पुरुष लघु मध्य बड़ेरे। सब सनमानि कृपानिधि फेरे।।
स्रोत अभिलेख 2.319 · पुस्तक पृ. 610, 611
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबको छोटे भाई लक्ष्मणजीसहित श्रीरामचन्द्रजीने यथायोग्य विनय एवं प्रणाम करके विदा किया। कृपानिधान श्रीरामचन्द्रजीने छोटे, मध्यम (मझले) और बड़े सभी श्रेणीके स्त्री-पुरुषोंका सम्मान करके उनको लौटाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 611 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जथा जोगु करि बिनय प्रनामा। बिदा किए सब सानुज रामा।।
English explanation
Rama, with his younger brother, bade everyone farewell with humble words and salutations appropriate to each.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसा | as |
| जोगु | उचित था | was appropriate |
| करि | करके | having offered |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble words |
| प्रनामा | प्रणाम | salutations |
| बिदा | विदा | farewell |
| किए | किया | gave |
| सब | सबको | to everyone |
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| रामा | राम ने | Rama |
2 नारि पुरुष लघु मध्य बड़ेरे। सब सनमानि कृपानिधि फेरे।।
English explanation
Rama, the treasure of compassion, honored everyone—women and men, the young, those in between, and elders—and sent them back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| पुरुष | पुरुष | men |
| लघु | छोटे | the young or lesser |
| मध्य | मध्यम | those in between |
| बड़ेरे | बड़े | elders or seniors |
| सब | सबको | everyone |
| सनमानि | सम्मान करके | having honored |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम ने | Rama, the treasure of compassion |
| फेरे | वापस भेजा | sent back |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.319
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 611
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 611
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।