अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सासु समीप गए दोउ भाई। फिरे बंदि पग आसिष पाई।।
मूल पाठ
सासु समीप गए दोउ भाई। फिरे बंदि पग आसिष पाई।।
कौसिक बामदेव जाबाली। पुरजन परिजन सचिव सुचाली।।
स्रोत अभिलेख 2.319 · पुस्तक पृ. 610, 611
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब श्रीराम-लक्ष्मण दोनों भाई सास (सुनयनाजी) के पास गये और उनके चरणोंकी वन्दना करके आशीर्वाद पाकर लौट आये। फिर विश्वामित्र, वामदेव, जाबालि और शुभ आचरणवाले कुटुम्बी, नगरनिवासी और मन्त्री—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 611 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सासु समीप गए दोउ भाई। फिरे बंदि पग आसिष पाई।।
English explanation
The two brothers went to the mother-in-law and returned after bowing at her feet and receiving her blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासु | सास, सीता की माता के | the mother-in-law, Sita’s mother |
| समीप | पास | near; into the presence of |
| गए | गए | went |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| फिरे | लौटे | returned |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| पग | चरणों को | her feet |
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| पाई | पाकर | having received |
2 कौसिक बामदेव जाबाली। पुरजन परिजन सचिव सुचाली।।
English explanation
Vishvamitra, Vamadeva, Jabali, the townspeople, family members, and upright ministers are listed here as those bid farewell in the following line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसिक | कुशिक-वंशीय मुनि विश्वामित्र | Vishvamitra, the sage of Kushika’s lineage |
| बामदेव | मुनि वामदेव | the sage Vamadeva |
| जाबाली | मुनि जाबालि | the sage Jabali |
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| परिजन | परिवारजन और निकट संबंधी | family members and close relations |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सुचाली | सदाचारी | of upright conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.319
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 611
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 611
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।