अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुर पगु धारिअ देइ असीसा। कीन्ह धीर धरि गवनु महीसा।।
मूल पाठ
पुर पगु धारिअ देइ असीसा। कीन्ह धीर धरि गवनु महीसा।।
मुनि महिदेव साधु सनमाने। बिदा किए हरि हर सम जाने।।
स्रोत अभिलेख 2.319 · पुस्तक पृ. 610, 611
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब आशीर्वाद देकर नगरको पधारिये। यह सुन राजा जनकजीने धीरज धरकर गमन किया। फिर श्रीरामचन्द्रजीने मुनि, ब्राह्मण और साधुओंको विष्णु और शिवके समान जानकर सम्मान करके उनको विदा किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 610 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुर पगु धारिअ देइ असीसा। कीन्ह धीर धरि गवनु महीसा।।
English explanation
Please give your blessing and set out for the city. The king composed himself and departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर की ओर | toward the city |
| पगु | पाँव | foot |
| धारिअ | रखिए; प्रस्थान कीजिए | please set; set out |
| देइ | देकर | having given |
| असीसा | आशीर्वाद | blessing |
| कीन्ह | किया | made |
| धीर | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | having maintained |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| महीसा | राजा जनक ने | King Janaka |
2 मुनि महिदेव साधु सनमाने। बिदा किए हरि हर सम जाने।।
English explanation
Rama honored the sages, Brahmins, and holy people, and bade them farewell, regarding them as equal to Vishnu and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों को | the sages |
| महिदेव | ब्राह्मणों को | the Brahmins |
| साधु | साधुओं को | the holy people |
| सनमाने | सम्मान दिया | honored |
| बिदा | विदा | farewell |
| किए | किया | gave |
| हरि | विष्णु | Vishnu |
| हर | शिव | Shiva |
| सम | के समान | equal to |
| जाने | मानकर | regarding them as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.319
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 610
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 611
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।