अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सानुज राम नृपहि सिर नाई। कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटे भाई लक्ष्मणजीसमेत श्रीरामजीने राजा जनकजीको सिर नवाकर उनकी बहुत प्रकारसे विनती और बड़ाई की [और कहा—] हे देव! दयावश आपने बहुत दु:ख पाया। आप समाजसहित वनमें आये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 610 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सानुज राम नृपहि सिर नाई। कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई।।
देव दया बस बड़ दुखु पायउ। सहित समाज काननहिं आयउ।।
स्रोत अभिलेख 2.319 · पुस्तक पृ. 610, 611
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सानुज राम नृपहि सिर नाई। कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई।।
English explanation
AI draft: Rama, accompanied by his younger brother Lakshmana, bowed his head to King Janaka and offered many expressions of humility and praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| राम | राम | Rama, the prince of Ayodhya |
| नृपहि | राजा जनक को | to King Janaka |
| सिर | सिर | head |
| नाई | नवाकर | having bowed |
| कीन्हि | की | offered |
| बहुत | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble entreaty |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
2 देव दया बस बड़ दुखु पायउ। सहित समाज काननहिं आयउ।।
English explanation
O king, moved by compassion, you endured great hardship and came to the forest with your company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | हे राजन् | O revered king |
| दया | दया | compassion |
| बस | के वश होकर | moved by |
| बड़ | बड़ा | great |
| दुखु | कष्ट | hardship |
| पायउ | आपने उठाया | you endured |
| सहित | साथ लेकर | accompanied by |
| समाज | अपना समाज | your company |
| काननहिं | वन में | to the forest |
| आयउ | आप आए | you came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.319
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 610
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 611
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।