अयोध्याकाण्ड · दोहा 319 · दोहा/सोरठा
भरत मातु पद बंदि प्रभु सुचि सनेहँ मिलि भेंटि।
भरत मातु पद बंदि प्रभु सुचि सनेहँ मिलि भेंटि।
बिदा कीन्ह सजि पालकी सकुच सोच सब मेटि।।319।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.319 · पुस्तक पृ. 610, 611
भावार्थ और शब्दार्थ
1भरत मातु पद बंदि प्रभु सुचि सनेहँ मिलि भेंटि।
प्रभु राम ने भरत की माता कैकेयी के चरणों को प्रणाम किया और निर्मल स्नेह से उनसे मिलकर भेंट की।
English explanation
Lord Rama bowed at the feet of Bharata’s mother Kaikeyi and met and greeted her with pure affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| मातु | माता कैकेयी | mother Kaikeyi |
| पद | चरणों को | feet |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सुचि | निर्मल | pure |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| मिलि | मिलकर | having met |
| भेंटि | स्नेहपूर्वक भेंट करके | having greeted affectionately |
2 बिदा कीन्ह सजि पालकी सकुच सोच सब मेटि।।319।।
राम ने पालकी तैयार कराकर और कैकेयी का सारा संकोच तथा चिंता मिटाकर उन्हें विदा किया।
English explanation
Rama had the palanquin prepared and bade Kaikeyi farewell, removing all her embarrassment and anxiety.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिदा | विदा | farewell |
| कीन्ह | किया | gave |
| सजि | तैयार करके | having prepared |
| पालकी | पालकी | palanquin |
| सकुच | संकोच | embarrassment or hesitation |
| सोच | चिंता | anxiety |
| सब | सारा | all |
| मेटि | मिटाकर | having removed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 319
- स्रोत अभिलेख
- 2.319
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 611
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।