अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ग्राम निकट जब निकसहि जाई। देखहि दरसु नारि नर धाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब वे किसी गाँवके पास होकर निकलते हैं तब स्त्री-पुरुष दौड़कर उनके रूपको देखने लगते हैं। जन्मका फल पाकर वे [सदाके अनाथ] सनाथ हो जाते हैं और मनको नाथके साथ भेजकर [शरीरसे साथ न रहनेके कारण] दु:खी होकर लौट आते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 434 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ग्राम निकट जब निकसहि जाई। देखहि दरसु नारि नर धाई।।
होहि सनाथ जनम फलु पाई। फिरहि दुखित मनु संग पठाई।।
स्रोत अभिलेख 2.109 · पुस्तक पृ. 433, 434
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ग्राम निकट जब निकसहि जाई। देखहि दरसु नारि नर धाई।।
English explanation
Whenever they passed near a village, women and men hurried over to behold them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्राम | गाँव के | a village |
| निकट | पास | near |
| जब | जब | when |
| निकसहि | निकलते हैं | pass by |
| जाई | जाते हुए | while going |
| देखहि | देखते हैं | behold |
| दरसु | दर्शन | their blessed presence |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| धाई | दौड़कर | hurrying over |
2 होहि सनाथ जनम फलु पाई। फिरहि दुखित मनु संग पठाई।।
English explanation
Having attained the fruit of life, they felt blessed with a protector; then they returned sorrowful at parting, sending their minds along with them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहि | हो जाते हैं | become |
| सनाथ | नाथयुक्त; आश्रय पाकर धन्य | blessed with a protector |
| जनम | जीवन का | of life |
| फलु | फल | fruit; fulfillment |
| पाई | पाकर | having attained |
| फिरहि | लौटते हैं | return |
| दुखित | दुखी | sorrowful |
| मनु | अपना मन | their minds |
| संग | उनके साथ | along with them |
| पठाई | भेजकर | having sent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 434
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 433, 434
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।