अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि बटु चारि संग तब दीन्हे। जिन्ह बहु जनम सुकृत सब कीन्हे।।
मूल पाठ
मुनि बटु चारि संग तब दीन्हे। जिन्ह बहु जनम सुकृत सब कीन्हे।।
करि प्रनामु रिषि आयसु पाई। प्रमुदित हृदयँ चले रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 2.109 · पुस्तक पृ. 433, 434
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब मुनिने [चुनकर] चार ब्रह्मचारियोंको साथ कर दिया, जिन्होंने बहुत जन्मोंतक सब सुकृत (पुण्य) किये थे। श्रीरघुनाथजी प्रणाम कर और ऋषिकी आज्ञा पाकर हृदयमें बड़े ही आनन्दित होकर चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 434 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि बटु चारि संग तब दीन्हे। जिन्ह बहु जनम सुकृत सब कीन्हे।।
English explanation
The sage then sent four young celibate students along with them, who had performed every kind of virtuous deed over many lifetimes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| बटु | ब्रह्मचारी शिष्य | young celibate students |
| चारि | चार | four |
| संग | साथ | as companions |
| तब | तब | then |
| दीन्हे | दिए; साथ भेजे | assigned; sent along |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| बहु | अनेक | many |
| जनम | जन्मों में | in lifetimes |
| सुकृत | पुण्यकर्म | virtuous deeds |
| सब | सब | all |
| कीन्हे | किए थे | had performed |
2 करि प्रनामु रिषि आयसु पाई। प्रमुदित हृदयँ चले रघुराई।।
English explanation
After bowing and receiving the sage’s permission, Rama, lord of the Raghu lineage, set out with a joyful heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| रिषि | ऋषि की | the sage’s |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाई | पाकर | having received |
| प्रमुदित | बहुत प्रसन्न | joyful |
| हृदयँ | हृदय से | at heart |
| चले | चल पड़े | set out |
| रघुराई | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 434
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 433, 434
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।