अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर पितु मातु बंधु सुर साई। सेइअहिं सकल प्रान की नाईं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरु, पिता, माता, भाई, देवता और स्वामी, इन सबकी सेवा प्राणके समान करनी चाहिये। फिर श्रीरामचन्द्रजी तो प्राणोंके भी प्रिय हैं, हृदयके भी जीवन हैं और सभीके स्वार्थरहित सखा हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 405 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुर पितु मातु बंधु सुर साई। सेइअहिं सकल प्रान की नाईं।।
रामु प्रानप्रिय जीवन जी के। स्वारथ रहित सखा सबही कै।।
स्रोत अभिलेख 2.74 · पुस्तक पृ. 404, 405
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गुर पितु मातु बंधु सुर साई। सेइअहिं सकल प्रान की नाईं।।
English explanation
Teacher, father, mother, brother, gods, and master—all should be served as dearly as one's own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | teacher |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| बंधु | भाई या संबंधी | brother or kinsman |
| सुर | देवता | gods |
| साई | स्वामी | master |
| सेइअहिं | सेवा करनी चाहिए | should be served |
| सकल | सबकी | all |
| प्रान | अपने प्राण | one's own life |
| की | के | of |
| नाईं | समान | like |
2 रामु प्रानप्रिय जीवन जी के। स्वारथ रहित सखा सबही कै।।
English explanation
Rama is dear to one's very life and is the life of living beings; he is everyone's selfless friend.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | श्रीराम | Rama |
| प्रानप्रिय | प्राणों के प्रिय | dear to one's very life |
| जीवन | जीवन; जीवन का आधार | life; sustaining life |
| जी | जीवों | living beings |
| के | के | of |
| स्वारथ | स्वार्थ | self-interest |
| रहित | से रहित | free from |
| सखा | मित्र | friend |
| सबही | सभी | everyone |
| कै | के | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 405
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 404, 405
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।