अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर नृप भरत सभा अवलोकी। सकुचि राम फिरि अवनि बिलोकी।।
मूल पाठ
गुर नृप भरत सभा अवलोकी। सकुचि राम फिरि अवनि बिलोकी।।
सील सराहि सभा सब सोची। कहुँ न राम सम स्वामि सँकोची।।
स्रोत अभिलेख 2.313 · पुस्तक पृ. 605, 606
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीने गुरु वसिष्ठजी, राजा जनकजी, भरतजी और सारी सभाकी ओर देखा, किन्तु फिर सकुचाकर दृष्टि फेरकर वे पृथ्वीकी ओर ताकने लगे। सभा उनके शीलकी सराहना करके सोचती है कि श्रीरामचन्द्रजीके समान संकोची स्वामी कहीं नहीं हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 606 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर नृप भरत सभा अवलोकी। सकुचि राम फिरि अवनि बिलोकी।।
English explanation
Rama looked at the guru, King Janaka, Bharata, and the assembly; then, feeling hesitant, he looked toward the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the guru, Vasishtha |
| नृप | राजा जनक | King Janaka |
| भरत | भरत | Bharata |
| सभा | सभा | the assembly |
| अवलोकी | देखा | looked at |
| सकुचि | संकोच करके | feeling hesitant |
| राम | राम ने | Rama |
| फिरि | फिर | then |
| अवनि | पृथ्वी; जमीन | the ground |
| बिलोकी | देखा | looked at |
2 सील सराहि सभा सब सोची। कहुँ न राम सम स्वामि सँकोची।।
English explanation
Praising his gentle character, the entire assembly reflected that nowhere is there a lord as modest and considerate as Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सील | शील; विनम्र स्वभाव | gentle character |
| सराहि | सराहकर | having praised |
| सभा | सभा | assembly |
| सब | सारी | entire |
| सोची | विचार किया | reflected |
| कहुँ | कहीं | anywhere |
| न | नहीं | not |
| राम | राम | Rama |
| सम | के समान | like |
| स्वामि | स्वामी | lord |
| सँकोची | संकोची; दूसरों का मान रखने वाले | modest and considerate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.313
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 606
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 606
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।