अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सुजान राम रुख देखी। उठि सप्रेम धरि धीर बिसेषी।।
मूल पाठ
भरत सुजान राम रुख देखी। उठि सप्रेम धरि धीर बिसेषी।।
करि दंडवत कहत कर जोरी। राखीं नाथ सकल रुचि मोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.313 · पुस्तक पृ. 605, 606
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुजान भरतजी श्रीरामचन्द्रजीका रुख देखकर प्रेमपूर्वक उठकर, विशेषरूपसे धीरज धारणकर दण्डवत् करके हाथ जोड़कर कहने लगे—हे नाथ! आपने मेरी सभी रुचियाँ रखीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 606 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भरत सुजान राम रुख देखी। उठि सप्रेम धरि धीर बिसेषी।।
English explanation
Perceptive Bharata, seeing Rama’s disposition, rose lovingly and composed himself with great fortitude.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत | Bharata |
| सुजान | समझदार | perceptive |
| राम | राम का | Rama’s |
| रुख | भाव; मनोभाव | disposition |
| देखी | देखकर | seeing |
| उठि | उठकर | rising |
| सप्रेम | प्रेम सहित | with love |
| धरि | धारण करके | having mustered |
| धीर | धैर्य | fortitude |
| बिसेषी | विशेष; बहुत | great |
2 करि दंडवत कहत कर जोरी। राखीं नाथ सकल रुचि मोरी।।
English explanation
After prostrating, Bharata speaks with folded hands: ‘Lord, you have honored all my wishes.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| दंडवत | साष्टांग प्रणाम | a full prostration |
| कहत | कहते हैं | says |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| राखीं | मान रखा; पूरी कीं | honored; fulfilled |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| सकल | सभी | all |
| रुचि | इच्छाएँ | wishes |
| मोरी | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.313
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 606
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 606
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।