अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू। बहुत भाँति दुखु पावा आपू।।
मूल पाठ
मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू। बहुत भाँति दुखु पावा आपू।।
अब गोसाइँ मोहि देउ रजाई। सेवौं अवध अवधि भरि जाई।।
स्रोत अभिलेख 2.313 · पुस्तक पृ. 605, 606
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे लिये सब लोगोंने सन्ताप सहा और आपने भी बहुत प्रकारसे दु:ख पाया। अब स्वामी मुझे आज्ञा दें। मैं जाकर अवधिभर (चौदह वर्षतक) अवधका सेवन करूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 606 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू। बहुत भाँति दुखु पावा आपू।।
English explanation
‘For my sake you endured every distress and yourself suffered in many ways.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मेरे | me |
| लगि | लिए | for the sake of |
| सहेउ | सहे | endured |
| सबहिं | सभी | all |
| संतापू | कष्ट; संताप | distress |
| बहुत | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| दुखु | दुःख | suffering |
| पावा | पाया; भोगा | experienced |
| आपू | आपने स्वयं | you yourself |
2 अब गोसाइँ मोहि देउ रजाई। सेवौं अवध अवधि भरि जाई।।
English explanation
‘Now, Lord, give me leave to go to Ayodhya and serve for the duration of your exile.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| गोसाइँ | हे स्वामी | O Lord |
| मोहि | मुझे | to me |
| देउ | दीजिए | please give |
| रजाई | आज्ञा; अनुमति | permission |
| सेवौं | मैं सेवा करूँ | that I may serve |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| अवधि | वनवास की निर्धारित अवधि | the appointed period of exile |
| भरि | भर; पूरे समय | throughout |
| जाई | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.313
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 606
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 606
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।