अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू। भरत भूमिसुर तेरहुति राजू।।
मूल पाठ
भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू। भरत भूमिसुर तेरहुति राजू।।
भल दिन आजु जानि मन माहीं। रामु कृपाल कहत सकुचाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.313 · पुस्तक पृ. 605, 606
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[अगले छठे दिन] सबेरे स्नान करके भरतजी, ब्राह्मण, राजा जनक और सारा समाज आ जुटा। आज सबको विदा करनेके लिये अच्छा दिन है, यह मनमें जानकर भी कृपालु श्रीरामजी कहनेमें सकुचा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 605 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू। भरत भूमिसुर तेरहुति राजू।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: After bathing in the morning, the whole gathering assembled—Bharata, the Brahmins, and Janaka, king of Tirhut.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोर | प्रातःकाल | in the morning |
| न्हाइ | स्नान करके | having bathed |
| सबु | सारा | the entire |
| जुरा | एकत्र हुआ | assembled |
| समाजू | समाज; जनसमूह | gathering |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| भूमिसुर | ब्राह्मण | Brahmins |
| तेरहुति | तिरहुत के | of Tirhut |
| राजू | राजा जनक | King Janaka |
2 भल दिन आजु जानि मन माहीं। रामु कृपाल कहत सकुचाहीं।।
English explanation
Though recognizing today as a favorable day, compassionate Rama felt inwardly hesitant to speak.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भल | अच्छा; शुभ | good; favorable |
| दिन | दिन | day |
| आजु | आज | today |
| जानि | जानकर | recognizing |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| रामु | राम | Rama |
| कृपाल | दयालु | compassionate |
| कहत | बोलने में | in speaking |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | hesitates |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.313
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 605
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 606
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।