अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर के बचन सचिव अभिनंदनु। सुने भरत हिय हित जनु चंदनु।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीने गुरुके वचनों और मन्त्रियोंके अभिनन्दन (अनुमोदन) को सुना, जो उनके हृदयके लिये मानो चन्दनके समान [शीतल] थे। फिर उन्होंने शील, स्नेह और सरलताके रसमें सनी हुई माता कौसल्याकी कोमल वाणी सुनी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 489 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुर के बचन सचिव अभिनंदनु। सुने भरत हिय हित जनु चंदनु।।
सुनी बहोरि मातु मृदु बानी। सील सनेह सरल रस सानी।।
स्रोत अभिलेख 2.176 · पुस्तक पृ. 489, 489
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर के बचन सचिव अभिनंदनु। सुने भरत हिय हित जनु चंदनु।।
English explanation
Bharata heard the guru’s words and the ministers’ endorsement, which were like soothing sandalwood for the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the guru, Vasishtha |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| सचिव | मंत्रियों का | the ministers’ |
| अभिनंदनु | समर्थन या अनुमोदन | endorsement |
| सुने | सुने | heard |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| हिय | हृदय के लिए | for the heart |
| हित | हितकारी | beneficial |
| जनु | मानो | as though |
| चंदनु | शीतल चंदन | soothing sandalwood |
2 सुनी बहोरि मातु मृदु बानी। सील सनेह सरल रस सानी।।
English explanation
Then Bharata heard his mother’s gentle words, imbued with the essence of graciousness, affection, and sincerity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनी | सुनी | heard |
| बहोरि | फिर | then |
| मातु | माता कौसल्या की | of his mother Kausalya |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
| सील | शील और सद्व्यवहार | graciousness |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सरल | सरलता | sincerity |
| रस | के रस में | with the essence of |
| सानी | सनी हुई | imbued |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.176
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 489
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 489, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।