अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
मूल पाठ
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 349, 350
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोयलकी-सी मीठी वाणीवाली, चन्द्रमाके समान मुखवाली और हिरनके बच्चेके-से नेत्रोंवाली स्त्रियाँ मङ्गलगान करने लगीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 350 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
English explanation
Women with cuckoo-sweet voices, moonlike faces, and eyes like those of fawns sing auspicious songs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावहिं | गाती हैं | sing |
| मंगल | मंगलगीत | auspicious songs |
| कोकिलबयनीं | कोयल जैसी मधुर वाणी वाली स्त्रियाँ | women with voices sweet as a cuckoo’s |
| बिधुबदनीं | चंद्रमा जैसे मुख वाली स्त्रियाँ | women with moonlike faces |
| मृगसावकनयनीं | हिरण के बच्चों जैसी आँखों वाली स्त्रियाँ | women with eyes like those of fawns |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 350
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 350
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।