अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।
मूल पाठ
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।
जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू।।
स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 349, 350
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने ग्रामदेवियों, देवताओं और नागोंकी पूजा की और फिर बलि भेंट देनेको कहा (अर्थात् कार्य सिद्ध होनेपर फिर पूजा करनेकी मनौती मानी); और प्रार्थना की कि जिस प्रकारसे श्रीरामचन्द्रजीका कल्याण हो, दया करके वही वरदान दीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 350 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।
English explanation
She worshipped the village goddess, the gods, and the serpent deities, and then instructed that their allotted offerings be given.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजीं | पूजा की | worshipped |
| ग्रामदेबि | ग्राम की अधिष्ठात्री देवी | the village’s presiding goddess |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| नागा | नाग देवताओं को | the serpent deities |
| कहेउ | कहा | said or instructed |
| बहोरि | फिर | then |
| देन | देने के लिए | to give |
| बलिभागा | नियत पूजा-अर्पण का भाग | their allotted share of ritual offerings |
2 जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू।।
English explanation
Graciously grant the boon that will ensure Rama’s well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | by whichever |
| बिधि | रीति या उपाय से | way or means |
| होइ | हो | may come about |
| राम | राम का | Rama’s |
| कल्यानू | कल्याण | well-being |
| देहु | दीजिए | grant |
| दया | कृपा | compassion |
| करि | करके | showing |
| सो | वही | that very |
| बरदानू | वरदान | boon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 350
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 350
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।