अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।
मूल पाठ
चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।
आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी।।
स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 349, 350
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुमित्राजीने मणियों (रत्नों)-के बहुत प्रकारके अत्यन्त सुन्दर और मनोहर चौक पूरे। आनन्दमें मग्न हुई श्रीरामचन्द्रजीकी माता कौसल्याजीने ब्राह्मणोंको बुलाकर बहुत दान दिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 350 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।
English explanation
Sumitra made beautiful ceremonial floor designs, set with jewels in various patterns—taking the uncertain form “पुरी” as the verb for making such designs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चौकें | मांगलिक चौक या भूमि-अलंकरण | ceremonial floor designs |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| सुमित्राँ | सुमित्रा ने | Sumitra, Lakshmana and Shatrughna’s mother |
| पुरी | चौक बनाए या पूरे | made or filled in the floor designs |
| मनिमय | मणियों से बने या सजे | made or adorned with jewels |
| बिबिध | विविध | various |
| भाँति | प्रकार से | in ways or patterns |
| अति | अत्यंत | very |
| रुरी | सुंदर, मनोहर | lovely |
2 आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी।।
English explanation
Absorbed in joy, Rama’s mother summoned Brahmins and gave abundant gifts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनँद | आनंद में | in joy |
| मगन | मग्न | absorbed |
| राम | राम की | Rama’s |
| महतारी | माता कौसल्या | mother, Kaushalya |
| दिए | दिए | gave |
| दान | दान | charitable gifts |
| बहु | बहुत | abundant |
| बिप्र | ब्राह्मणों को | to Brahmins |
| हँकारी | बुलाकर | having summoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 350
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 350
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।