अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।
मूल पाठ
प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।
स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 349, 350
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबसे पहले [रनिवासमें] जाकर जिन्होंने ये वचन (समाचार) सुनाये, उन्होंने बहुत-से आभूषण और वस्त्र पाये। रानियोंका शरीर प्रेमसे पुलकित हो उठा और मन प्रेममें मग्न हो गया। वे सब मङ्गलकलश सजाने लगीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 349 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।
English explanation
Those who first went and conveyed the news received many ornaments and garments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | सबसे पहले | first |
| जाइ | जाकर | having gone |
| जिन्ह | जिन लोगों ने | those who |
| बचन | समाचार | the news |
| सुनाए | सुनाए | conveyed |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बसन | वस्त्र | garments |
| भूरि | बहुत-से | many |
| तिन्ह | उन लोगों ने | those people |
| पाए | प्राप्त किए | received |
2 प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।
English explanation
With their bodies thrilled by love and their minds full of affection, all the women began preparing auspicious ceremonial pitchers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| पुलकि | रोमांचित होकर | thrilled, with hair standing on end |
| तन | शरीर | bodies |
| मन | मन | minds |
| अनुरागीं | प्रेम में अनुरक्त | filled with affection |
| मंगल | शुभ अवसर के | auspicious, ceremonial |
| कलस | कलश | pitchers |
| सजन | सजाने | to prepare and decorate |
| सब | सब स्त्रियाँ | all the women |
| लागीं | लग गईं | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 349
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 350
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