अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गए लखनु जहँ जानकिनाथू। भे मन मुदित पाइ प्रिय साथू।।
मूल पाठ
गए लखनु जहँ जानकिनाथू। भे मन मुदित पाइ प्रिय साथू।।
बंदि राम सिय चरन सुहाए। चले संग नृपमंदिर आए।।
स्रोत अभिलेख 2.76 · पुस्तक पृ. 406, 407
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणजी वहाँ गये जहाँ श्रीजानकीनाथजी थे, और प्रियका साथ पाकर मनमें बड़े ही प्रसन्न हुए। श्रीरामजी और सीताजीके सुन्दर चरणोंकी वन्दना करके वे उनके साथ चले और राजभवनमें आये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 406 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गए लखनु जहँ जानकिनाथू। भे मन मुदित पाइ प्रिय साथू।।
English explanation
AI-drafted meaning: Lakshmana went where Rama, Janaki’s husband, was. He became glad at heart on gaining his beloved brother’s company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गए | गए | went |
| लखनु | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| जहँ | जहाँ | where |
| जानकिनाथू | जानकी के स्वामी राम | Rama, Janaki’s husband |
| भे | हुए | became |
| मन | मन में | at heart |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| पाइ | पाकर | having gained |
| प्रिय | प्रिय राम का | of his beloved Rama |
| साथू | साथ | company |
2 बंदि राम सिय चरन सुहाए। चले संग नृपमंदिर आए।।
English explanation
After bowing to the beautiful feet of Rama and Sita, Lakshmana went with them and reached the royal palace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| राम | राम के | of Rama |
| सिय | सीता के | of Sita |
| चरन | चरण | feet |
| सुहाए | सुंदर | beautiful |
| चले | चले | went |
| संग | साथ | together with them |
| नृपमंदिर | राजा के महल में | to the royal palace |
| आए | आए | arrived |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 406
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 406, 407
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।