अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं परसपर पुर नर नारी। भलि बनाइ बिधि बात बिगारी।।
मूल पाठ
कहहिं परसपर पुर नर नारी। भलि बनाइ बिधि बात बिगारी।।
तन कृस दुखु बदन मलीने। बिकल मनहुँ माखी मधु छीने।।
स्रोत अभिलेख 2.76 · पुस्तक पृ. 406, 407
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरके स्त्री-पुरुष आपसमें कह रहे हैं कि विधाताने खूब बनाकर बात बिगाड़ी! उनके शरीर दुबले, मन दु:खी और मुख उदास हो रहे हैं। वे ऐसे व्याकुल हैं जैसे शहद छीन लिये जानेपर शहदकी मक्खियाँ व्याकुल हों॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 406 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहिं परसपर पुर नर नारी। भलि बनाइ बिधि बात बिगारी।।
English explanation
The city’s men and women say to one another, “Fate arranged matters well, only to spoil them.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say |
| परसपर | आपस में | to one another |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| भलि | अच्छी | favorable |
| बनाइ | बनाकर | having arranged |
| बिधि | विधाता ने | Fate, the disposer of events |
| बात | बात; परिस्थिति | the situation |
| बिगारी | बिगाड़ दी | spoiled |
2 तन कृस दुखु बदन मलीने। बिकल मनहुँ माखी मधु छीने।।
English explanation
Their bodies are wasted by sorrow and their faces are downcast. They are distraught like bees deprived of their honey.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तन | शरीर | bodies |
| कृस | क्षीण | wasted; thin |
| दुखु | दुःख से | from sorrow |
| बदन | चेहरे | faces |
| मलीने | उदास; कांतिहीन | downcast; lacking radiance |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| मनहुँ | मानो | as though |
| माखी | मधुमक्खियाँ | bees |
| मधु | शहद | honey |
| छीने | छिन जाने पर | when taken away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 406
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 406, 407
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।