अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कर मीजहिं सिरु धुनि पछिताहीं। जनु बिन पंख बिहग अकुलाहीं।।
मूल पाठ
कर मीजहिं सिरु धुनि पछिताहीं। जनु बिन पंख बिहग अकुलाहीं।।
भइ बड़ि भीर भूप दरबारा। बरनि न जाइ बिषादु अपारा।।
स्रोत अभिलेख 2.76 · पुस्तक पृ. 406, 407
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब हाथ मल रहे हैं और सिर धुनकर (पीटकर) पछता रहे हैं। मानो बिना पंखके पक्षी व्याकुल हो रहे हैं। राजद्वारपर बड़ी भीड़ हो रही है। अपार विषादका वर्णन नहीं किया जा सकता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 406 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कर मीजहिं सिरु धुनि पछिताहीं। जनु बिन पंख बिहग अकुलाहीं।।
English explanation
They wring their hands, beat their heads, and lament, as though they were birds struggling without wings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कर | हाथ | hands |
| मीजहिं | मलते हैं | wring |
| सिरु | सिर | heads |
| धुनि | पीटकर | beating |
| पछिताहीं | पछताते हैं; दुःख करते हैं | lament; grieve |
| जनु | मानो | as though |
| बिन | बिना | without |
| पंख | पंखों के | wings |
| बिहग | पक्षी | birds |
| अकुलाहीं | छटपटाते हैं | struggle in distress |
2 भइ बड़ि भीर भूप दरबारा। बरनि न जाइ बिषादु अपारा।।
English explanation
A great crowd gathered at the king’s court. Its boundless sorrow cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भइ | हो गई | formed; arose |
| बड़ि | बड़ी | great |
| भीर | भीड़ | crowd |
| भूप | राजा के | of the king |
| दरबारा | दरबार में | at the court |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बिषादु | शोक | sorrow |
| अपारा | अपार | boundless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 406
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 406, 407
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।