अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपापोंके समूहरूपी हाथीके मारनेके लिये सिंहरूप प्रयागराजका प्रभाव (महत्त्व—माहात्म्य) कौन कह सकता है। ऐसे सुहावने तीर्थराजका दर्शन कर सुखके समुद्र रघुकुलश्रेष्ठ श्रीरामजीने भी सुख पाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 431 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।।
अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।।
स्रोत अभिलेख 2.106 · पुस्तक पृ. 431, 432
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।।
English explanation
AI-draft rendering: Who can describe Prayag’s power? It is a lion to the elephant that represents the accumulated mass of sins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| कहि | कह | describe |
| सकइ | सकता है | can |
| प्रयाग | प्रयाग तीर्थ का | of Prayag, the sacred confluence |
| प्रभाऊ | प्रभाव; महिमा | power; glory |
| कलुष | पापों का | of sins |
| पुंज | समूह | accumulated mass |
| कुंजर | हाथी | elephant |
| मृगराऊ | सिंह; पशुओं का राजा | lion; king of beasts |
2 अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।।
English explanation
Seeing such a beautiful Prayag, lord of sacred places, Rama—himself an ocean of joy—felt joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| तीरथपति | तीर्थों के स्वामी प्रयाग को | Prayag, lord of sacred places |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सुहावा | सुंदर; मनोहर | beautiful; delightful |
| सुख | सुख का | of joy |
| सागर | सागर | ocean |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ श्रीराम ने | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| सुखु | सुख | joy |
| पावा | पाया | experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 431
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 431, 432
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।