अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोटि मनोज लजावनिहारे। सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे।।
मूल पाठ
कोटि मनोज लजावनिहारे। सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे।।
सुनि सनेहमय मंजुल बानी। सकुची सिय मन महुँ मुसुकानी।।
स्रोत अभिलेख 2.117 · पुस्तक पृ. 440, 441
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे सुमुखि! कहो तो अपनी सुन्दरतासे करोड़ों कामदेवोंको लजानेवाले ये तुम्हारे कौन हैं? उनकी ऐसी प्रेममयी सुन्दर वाणी सुनकर सीताजी सकुचा गयीं और मन-ही-मन मुसकरायीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 440 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोटि मनोज लजावनिहारे। सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे।।
English explanation
O lovely-faced lady, tell us: who are these men to you, whose beauty puts millions of love-gods to shame?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| मनोज | कामदेवों को | gods of love |
| लजावनिहारे | लजा देने वाले | those who put to shame |
| सुमुखि | हे सुंदर मुख वाली | O lovely-faced lady |
| कहहु | बताओ | tell us |
| को | कौन | who |
| आहिं | हैं | are |
| तुम्हारे | तुम्हारे संबंध में | in relation to you |
2 सुनि सनेहमय मंजुल बानी। सकुची सिय मन महुँ मुसुकानी।।
English explanation
Hearing those lovely, affectionate words, Sita grew shy and smiled inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सनेहमय | स्नेह से भरी | filled with affection |
| मंजुल | सुंदर | lovely |
| बानी | वाणी | speech |
| सकुची | संकोच में पड़ गईं | grew shy |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| मन | मन | heart |
| महुँ | में | within |
| मुसुकानी | मुसकराईं | smiled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 440
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 440, 441
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।