अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कैकेई भव तनु अनुरागे। पाँवर प्रान अघाइ अभागे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकैकेयीसे उत्पन्न देहमें प्रेम करनेवाले ये पामर प्राण भरपेट (पूरी तरहसे) अभागे हैं। जब प्रियके वियोगमें भी मुझे प्राण प्रिय लग रहे हैं तब अभी आगे मैं और भी बहुत कुछ देखूँ-सुनूँगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 492 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कैकेई भव तनु अनुरागे। पाँवर प्रान अघाइ अभागे।।
जौं प्रिय बिरहँ प्रान प्रिय लागे। देखब सुनब बहुत अब आगे।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 492, 493
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कैकेई भव तनु अनुरागे। पाँवर प्रान अघाइ अभागे।।
English explanation
AI draft: Born of Kaikeyi, these base, deeply unfortunate life-breaths cling to worldly existence and the body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकेई | कैकेयी से जन्मे | born of Kaikeyi |
| भव | सांसारिक जीवन में | to worldly existence |
| तनु | शरीर में | to the body |
| अनुरागे | आसक्त | attached |
| पाँवर | नीच | base |
| प्रान | प्राण | life-breaths |
| अघाइ | अत्यंत | exceedingly |
| अभागे | अभागे | unfortunate |
2 जौं प्रिय बिरहँ प्रान प्रिय लागे। देखब सुनब बहुत अब आगे।।
English explanation
If life remains dear even in separation from the beloved, I shall have much more to see and hear ahead.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| प्रिय | प्रिय के | from the beloved |
| बिरहँ | वियोग में | in separation |
| प्रान | प्राण | life |
| प्रिय | प्यारे | dear |
| लागे | लगते हैं | seem |
| देखब | देखना पड़ेगा | shall have to see |
| सुनब | सुनना पड़ेगा | shall have to hear |
| बहुत | बहुत कुछ | much |
| अब | अब | now |
| आगे | आगे | in the future |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 492
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 492, 493
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।