अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखन राम सिय कहुँ बनु दीन्हा। पठइ अमरपुर पति हित कीन्हा।।
मूल पाठ
लखन राम सिय कहुँ बनु दीन्हा। पठइ अमरपुर पति हित कीन्हा।।
लीन्ह बिधवपन अपजसु आपू। दीन्हेउ प्रजहि सोकु संतापू।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 492, 493
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मण, श्रीरामजी और सीताजीको तो वन दिया; स्वर्ग भेजकर पतिका कल्याण किया; स्वयं विधवापन और अपयश लिया; प्रजाको शोक और सन्ताप दिया;॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 492 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लखन राम सिय कहुँ बनु दीन्हा। पठइ अमरपुर पति हित कीन्हा।।
English explanation
Kaikeyi gave Lakshmana, Rama, and Sita the forest, and ‘benefited’ her husband by sending him to heaven.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण को | Lakshmana, Rama’s brother |
| राम | राम को | Rama |
| सिय | सीता को | Sita, Rama’s wife |
| कहुँ | को | to |
| बनु | वनवास | life in the forest |
| दीन्हा | दिया | gave |
| पठइ | भेजकर | having sent |
| अमरपुर | स्वर्ग को | to heaven |
| पति | पति दशरथ का | her husband Dasharatha’s |
| हित | ‘भला’ | ‘benefit’ |
| कीन्हा | किया | did |
2 लीन्ह बिधवपन अपजसु आपू। दीन्हेउ प्रजहि सोकु संतापू।।
English explanation
She took widowhood and disgrace upon herself and gave the people grief and anguish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लीन्ह | ले लिया | took upon herself |
| बिधवपन | विधवापन | widowhood |
| अपजसु | बदनामी | disgrace |
| आपू | स्वयं | herself |
| दीन्हेउ | दिया | gave |
| प्रजहि | प्रजा को | to the people |
| सोकु | शोक | grief |
| संतापू | संताप | anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 492
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 492, 493
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