अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई।।
मूल पाठ
कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई।।
वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू।।
स्रोत अभिलेख 2.101 · पुस्तक पृ. 427, 428
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपाके समुद्र श्रीरामचन्द्रजी केवटसे मुसकराकर बोले—भाई! तू वही कर जिससे तेरी नाव न जाय। जल्दी पानी ला और पैर धो ले। देर हो रही है, पार उतार दे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 427 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई।।
English explanation
AI-draft interpretation: Rama, the ocean of compassion, smiled and said, “Do whatever will keep your boat from being lost.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम | Rama, the ocean of compassion |
| बोले | बोले | said |
| मुसुकाई | मुसकराकर | with a smile |
| सोइ | वही | that very thing |
| करु | करो | do |
| जेंहि | जिससे | by which |
| तव | तुम्हारी | your |
| नाव | नाव | boat |
| न | न | not |
| जाई | चली जाए या नष्ट हो | be lost or ruined |
2 वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू।।
English explanation
Bring water quickly and wash my feet. We are being delayed; take us across.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वेगि | शीघ्र | quickly |
| आनु | लाओ | bring |
| जल | पानी | water |
| पाय | पैर | feet |
| पखारू | धो लो | wash |
| होत | हो रहा है | is occurring |
| बिलंबु | विलंब | delay |
| उतारहि | उतार दो | take us over |
| पारू | दूसरे किनारे | to the other bank |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 427
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 427, 428
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।