अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी। बोले पानि पंकरुह जोरी।।
मूल पाठ
कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी। बोले पानि पंकरुह जोरी।।
नाथ भयउ सुखु साथ गए को। लहेउँ लाहु जग जनमु भए को।।
स्रोत अभिलेख 2.307 · पुस्तक पृ. 601, 601
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने फिर प्रेमपूर्वक प्रणाम किया और करकमलोंको जोड़कर वे बोले—हे नाथ! मुझे आपके साथ जानेका सुख प्राप्त हो गया और मैंने जगत्में जन्म लेनेका लाभ भी पा लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 601 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी। बोले पानि पंकरुह जोरी।।
English explanation
Bharata again bowed lovingly and spoke with his lotus-like hands joined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया | performed |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | lovingly |
| प्रनामु | प्रणाम | reverent bow |
| बहोरी | फिर | again |
| बोले | बोले | spoke |
| पानि | हाथ | hands |
| पंकरुह | कमल-समान | lotus-like |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
2 नाथ भयउ सुखु साथ गए को। लहेउँ लाहु जग जनमु भए को।।
English explanation
Lord, I have gained the joy of going with you and attained the fruit of being born in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| भयउ | प्राप्त हुआ | was gained |
| सुखु | सुख | joy |
| साथ | आपके साथ | with you |
| गए | जाने | going |
| को | का | of |
| लहेउँ | मैंने पाया | I obtained |
| लाहु | लाभ, फल | benefit, fruit |
| जग | संसार में | in the world |
| जनमु | जन्म | birth |
| भए | होने | having occurred |
| को | का | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.307
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 601
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 601, 601
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।