अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब कृपाल जस आयसु होई। करौं सीस धरि सादर सोई।।
मूल पाठ
अब कृपाल जस आयसु होई। करौं सीस धरि सादर सोई।।
सो अवलंब देव मोहि देई। अवधि पारु पावौं जेहि सेई।।
स्रोत अभिलेख 2.307 · पुस्तक पृ. 601, 601
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे कृपालु! अब जैसी आज्ञा हो, उसीको मैं सिरपर धरकर आदरपूर्वक करूँ! परन्तु देव! आप मुझे वह अवलम्बन (कोई सहारा) दें जिसकी सेवा कर मैं अवधिका पार पा जाऊँ (अवधिको बिता दूँ)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 601 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब कृपाल जस आयसु होई। करौं सीस धरि सादर सोई।।
English explanation
Merciful lord, whatever your command may now be, I will reverently accept it and carry it out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| कृपाल | हे कृपालु | O merciful lord |
| जस | जैसी | whatever |
| आयसु | आज्ञा | command |
| होई | होगी | may be |
| करौं | मैं करूँगा | I will carry out |
| सीस | सिर पर | upon my head |
| धरि | धारण करके | having placed |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सोई | वही | that very thing |
2 सो अवलंब देव मोहि देई। अवधि पारु पावौं जेहि सेई।।
English explanation
Lord, give me such a support that, by serving it, I may endure until the appointed period ends.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह, ऐसा | that, such |
| अवलंब | सहारा | support |
| देव | हे प्रभु | O lord |
| मोहि | मुझे | to me |
| देई | दीजिए | please give |
| अवधि | निर्धारित अवधि का | of the appointed period |
| पारु | पार, अंत | far side, end |
| पावौं | मैं पहुँच सकूँ | I may reach |
| जेहि | जिसको | which |
| सेई | सेवकर | by serving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.307
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 601
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 601, 601
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।