अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कामद मे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत बिषादा।।
मूल पाठ
कामद मे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत बिषादा।।
सर सरिता बन भूमि बिभागा। जनु उमगत आनँद अनुरागा।।
स्रोत अभिलेख 2.279 · पुस्तक पृ. 576, 577
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीकी कृपासे सब पर्वत मनचाही वस्तु देनेवाले हो गये। वे देखनेमात्रसे ही दु:खोंको सर्वथा हर लेते थे। वहाँके तालाबों, नदियों, वन और पृथ्वीके सभी भागोंमें मानो आनन्द और प्रेम उमड़ रहा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 576 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कामद मे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत बिषादा।।
English explanation
AI draft: Through Rama’s grace, the mountain became a fulfiller of wishes; beholding it dispels sorrow. The reading ‘मे’ is uncertain, so the first clause gives the probable sense.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कामद | मनोकामना पूरी करनेवाला | fulfilling wishes |
| मे | हो गया; पर्वत राम की कृपा से मनोकामना पूरी करने वाला बन गया। | Became; through Rama’s grace, the mountain became wish-fulfilling. |
| गिरि | पर्वत | the mountain |
| राम | श्रीराम की | of Rama |
| प्रसादा | कृपा से | through grace |
| अवलोकत | देखने पर | on beholding it |
| अपहरत | दूर करता है | dispels |
| बिषादा | शोक | sorrow |
2 सर सरिता बन भूमि बिभागा। जनु उमगत आनँद अनुरागा।।
English explanation
The lakes, rivers, woods, and stretches of land seemed to overflow with joy and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर | सरोवर | lakes |
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| बन | वन | woods |
| भूमि | भूमि के | of the land |
| बिभागा | विभिन्न भाग | various stretches |
| जनु | मानो | as though |
| उमगत | उमड़ रहे हों | were overflowing |
| आनँद | आनंद से | with joy |
| अनुरागा | प्रेम से | with affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.279
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 576
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 576, 577
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।