अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कान मूदि कर रद गहि जीहा। एक कहहिं यह बात अलीहा।।
मूल पाठ
कान मूदि कर रद गहि जीहा। एक कहहिं यह बात अलीहा।।
सुकृत जाहिं अस कहत तुम्हारे। रामु भरत कहुँ प्रानपिआरे।।
स्रोत अभिलेख 2.48 · पुस्तक पृ. 383, 384
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोई हाथोंसे कान मूँदकर और जीभको दाँतोंतले दबाकर कहते हैं कि यह बात झूठ है, ऐसी बात कहनेसे तुम्हारे पुण्य नष्ट हो जायँगे। भरतजीको तो श्रीरामचन्द्रजी प्राणोंके समान प्यारे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 384 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कान मूदि कर रद गहि जीहा। एक कहहिं यह बात अलीहा।।
English explanation
Some cover their ears with their hands and hold their tongues between their teeth, saying that this claim is false.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कान | कान | ears |
| मूदि | बंद करके | closing |
| कर | हाथों से | with their hands |
| रद | दाँतों से | with their teeth |
| गहि | पकड़कर | holding |
| जीहा | जीभ | the tongue |
| एक | कुछ लोग | some people |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| यह | यह | this |
| बात | बात | claim |
| अलीहा | झूठी है | is false |
2 सुकृत जाहिं अस कहत तुम्हारे। रामु भरत कहुँ प्रानपिआरे।।
English explanation
By saying such things you lose your merit; Rama is as dear to Bharata as his own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुकृत | पुण्य | spiritual merit |
| जाहिं | नष्ट हो जाते हैं | are lost |
| अस | ऐसा | such things |
| कहत | कहने से | by saying |
| तुम्हारे | तुम्हारे | your |
| रामु | राम | Rama |
| भरत | भरत | Bharata |
| कहुँ | को | to |
| प्रानपिआरे | प्राणों के समान प्यारे | as dear as life itself |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 384
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 383, 384
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।