अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि न जाइ कछु हृदय बिषादू। मनहुँ मृगी सुनि केहरि नादू।।
मूल पाठ
कहि न जाइ कछु हृदय बिषादू। मनहुँ मृगी सुनि केहरि नादू।।
नयन सजल तन थर थर काँपी। माजहि खाइ मीन जनु मापी।।
स्रोत अभिलेख 2.54 · पुस्तक पृ. 388, 389
भावार्थ
मूल पाठ के बादहृदयका विषाद कुछ कहा नहीं जाता। मानो सिं हकी गर्जना सुनकर हिरनी विकल हो गयी हो। नेत्रोंमें जल भर आया, शरीर थर-थर काँपने लगा। मानो मछली माँजा (पहली वर्षाका फेन) खाकर बदहवास हो गयी हो!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 388 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि न जाइ कछु हृदय बिषादू। मनहुँ मृगी सुनि केहरि नादू।।
English explanation
The sorrow in her heart cannot be expressed; she was like a doe hearing a lion’s roar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहा | expressed |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| कछु | कुछ भी | at all |
| हृदय | हृदय का | of the heart |
| बिषादू | विषाद; दुःख | sorrow |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मृगी | हिरनी | a doe |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| केहरि | सिंह की | a lion’s |
| नादू | गर्जना | roar |
2 नयन सजल तन थर थर काँपी। माजहि खाइ मीन जनु मापी।।
English explanation
Her eyes filled with tears and her body trembled, like a fish distressed after swallowing a fish-poisoning substance called maaj.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयन | आँखें | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरी | filled with tears |
| तन | शरीर | body |
| थर | थर- | trembling |
| थर | थर | trembling |
| काँपी | काँपीं | she trembled |
| माजहि | माज नामक मछली मारने वाला विष | maaj, a fish-poisoning substance |
| खाइ | खाकर | having swallowed |
| मीन | मछली | a fish |
| जनु | मानो | as though |
| मापी | व्याकुल; विष से प्रभावित | distressed; affected by poison |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 388
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 388, 389
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।