अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बचन बिनीत मधुर रघुबर के। सर सम लगे मातु उर करके।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरघुकुलमें श्रेष्ठ श्रीरामजीके ये बहुत ही नम्र और मीठे वचन माताके हृदयमें बाणके समान लगे और कसकने लगे। उस शीतल वाणीको सुनकर कौसल्या वैसे ही सहमकर सूख गयीं जैसे बरसातका पानी पडऩेसे जवासा सूख जाता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 388 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बचन बिनीत मधुर रघुबर के। सर सम लगे मातु उर करके।।
सहमि सूखि सुनि सीतलि बानी। जिमि जवास परें पावस पानी।।
स्रोत अभिलेख 2.54 · पुस्तक पृ. 388, 389
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बचन बिनीत मधुर रघुबर के। सर सम लगे मातु उर करके।।
English explanation
Rama’s humble, sweet words pierced mother Kaushalya’s heart like arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | words |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| मधुर | मधुर | sweet |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s line |
| के | के | of |
| सर | तीर | arrows |
| सम | समान | like |
| लगे | लगे; चुभे | struck; pierced |
| मातु | माता कौसल्या के | mother Kaushalya’s |
| उर | हृदय में | in the heart |
| करके | चुभने वाले; कष्टकारी | piercing; painful |
2 सहमि सूखि सुनि सीतलि बानी। जिमि जवास परें पावस पानी।।
English explanation
Hearing his gentle, soothing words, she became frightened and withered, like the javasa plant when rainwater falls upon it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहमि | सहम गईं | became frightened |
| सूखि | सूख गईं; मुरझा गईं | withered |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| सीतलि | शीतल; शांतिदायक | cool; soothing |
| बानी | वाणी | speech |
| जिमि | जैसे | just as |
| जवास | जवास का पौधा | the javasa plant |
| परें | पड़ने पर | when it falls |
| पावस | वर्षा का | of the rainy season |
| पानी | पानी | water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 388
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 388, 389
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