अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी।।
मूल पाठ
कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी।।
सुकृत सील सुख सीवँ सुहाई। जनम लाभ कइ अवधि अघाई।।
स्रोत अभिलेख 2.52 · पुस्तक पृ. 387, 387
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! माता बलिहारी जाती है, कहो, वह आनन्द-मङ्गलकारी लग्न कब है, जो मेरे पुण्य, शील और सुखकी सुन्दर सीमा है और जन्म लेनेके लाभकी पूर्णतम अवधि है;॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 387 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी।।
English explanation
Tell me, dear son—your mother offers herself wholly to you—when is the auspicious hour that brings joy and good fortune?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताओ | tell me |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| जननी | तुम्हारी माता | your mother |
| बलिहारी | तुम पर न्योछावर है | offers herself wholly to you |
| कबहिं | कब | when |
| लगन | शुभ मुहूर्त | the auspicious hour |
| मुद | आनंद देने वाला | bringing joy |
| मंगलकारी | मंगल करने वाला | bringing good fortune |
2 सुकृत सील सुख सीवँ सुहाई। जनम लाभ कइ अवधि अघाई।।
English explanation
That blessed hour is the lovely culmination of merit, virtue, and happiness, and the fullest realization of life’s purpose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुकृत | पुण्य | merit from good deeds |
| सील | सदाचार; सुशीलता | virtue; good character |
| सुख | सुख | happiness |
| सीवँ | सीमा; पराकाष्ठा | limit; culmination |
| सुहाई | सुंदर; मनोहर | lovely; pleasing |
| जनम | जन्म का | of birth; of life |
| लाभ | लाभ; सार्थकता | fulfillment; benefit |
| कइ | की | of |
| अवधि | सीमा; चरम उपलब्धि | utmost limit; culmination |
| अघाई | पूर्ण तृप्ति देने वाली | giving complete fulfillment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 387
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 387, 387
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।