अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं सनेह मगन मृदु बानी। मानत साधु पेम पहिचानी।।
मूल पाठ
कहहिं सनेह मगन मृदु बानी। मानत साधु पेम पहिचानी।।
तुम्ह सुकृती हम नीच निषादा। पावा दरसनु राम प्रसादा।।
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 551, 552
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रेममें मग्र हुए वे कोमल वाणीसे कहते हैं कि साधु लोग प्रेमको पहचानकर उसका सम्मान करते हैं (अर्थात् आप साधु हैं, आप हमारे प्रेमको देखिये, दाम देकर या वस्तुएँ लौटाकर हमारे प्रेमका तिरस्कार न कीजिये)। आप तो पुण्यात्मा हैं, हम नीच निषाद हैं। श्रीरामजीकी कृपासे ही हमने आपलोगोंके दर्शन पाये हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 552 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहहिं सनेह मगन मृदु बानी। मानत साधु पेम पहिचानी।।
English explanation
Absorbed in affection, the forest dwellers speak gently; the good-hearted visitors recognize their love and agree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | they say |
| सनेह | स्नेह में | in affection |
| मगन | मग्न | absorbed |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
| मानत | मान लेते हैं | agree; accept |
| साधु | सज्जन लोग | the good-hearted people |
| पेम | प्रेम | love |
| पहिचानी | पहचानकर | having recognized |
2 तुम्ह सुकृती हम नीच निषादा। पावा दरसनु राम प्रसादा।।
English explanation
They say: You are virtuous, while we are lowly Nishadas; through Rama’s grace we have been blessed with the sight of you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप लोग | you |
| सुकृती | पुण्यवान | virtuous; meritorious |
| हम | हम | we |
| नीच | नीच, तुच्छ | lowly |
| निषादा | निषाद समुदाय के लोग | people of the Nishada community |
| पावा | प्राप्त किया | have obtained |
| दरसनु | आपके दर्शन | the sight of you |
| राम | राम की | of Rama |
| प्रसादा | कृपा से | through grace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 552
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 552
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।