अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सबहि देहिं करि बिनय प्रनामा। कहि कहि स्वाद भेद गुन नामा।।
मूल पाठ
सबहि देहिं करि बिनय प्रनामा। कहि कहि स्वाद भेद गुन नामा।।
देहिं लोग बहु मोल न लेहीं। फेरत राम दोहाई देहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 551, 552
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबको विनय और प्रणाम करके उन चीजोंके अलग-अलग स्वाद, भेद (प्रकार), गुण और नाम बता-बताकर देते हैं। लोग उनका बहुत दाम देते हैं, पर वे नहीं लेते और लौटा देनेमें श्रीरामजीकी दुहाई देते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 552 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सबहि देहिं करि बिनय प्रनामा। कहि कहि स्वाद भेद गुन नामा।।
English explanation
With humble requests and salutations, they offer these to everyone, explaining their tastes, varieties, qualities, and names.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबहि | सबको | to everyone |
| देहिं | देते हैं | they give |
| करि | करके | having made |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble requests |
| प्रनामा | प्रणाम | salutations |
| कहि | बताकर | explaining |
| कहि | बताते हुए | explaining in turn |
| स्वाद | स्वाद | tastes |
| भेद | प्रकार, भिन्नताएँ | varieties; distinctions |
| गुन | गुण | qualities |
| नामा | नाम | names |
2 देहिं लोग बहु मोल न लेहीं। फेरत राम दोहाई देहीं।।
English explanation
People offer generous payment, but the forest dwellers refuse it; returning it, they appeal in Rama’s name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहिं | देते हैं, देना चाहते हैं | offer |
| लोग | आए हुए लोग | the visiting people |
| बहु | बहुत | much; generous |
| मोल | मूल्य, दाम | payment; price |
| न | नहीं | not |
| लेहीं | लेते हैं | they accept |
| फेरत | लौटाते हुए | returning it |
| राम | राम की | of Rama |
| दोहाई | नाम की दुहाई, आग्रहपूर्ण विनती | an earnest appeal in his name |
| देहीं | देते हैं | they make |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 552
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 552
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।