अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी।।
मूल पाठ
कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी।।
भरि भरि परन पुटीं रचि रुरी। कंद मूल फल अंकुर जूरी।।
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 551, 552
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोल, किरात और भील आदि वनके रहनेवाले लोग पवित्र, सुन्दर एवं अमृतके समान स्वादिष्ट मधु (शहद) को सुन्दर दोने बनाकर और उनमें भर-भरकर तथा कन्द, मूल, फल और अंकुर आदिकी जूडिय़ों (अँटियों) को॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 551 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी।।
English explanation
AI draft: The forest-dwelling Kols, Kiratas, and Bhils bring pure, fine, delicious honey, like nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोल | कोल समुदाय के लोग | people of the Kol community |
| किरात | किरात वनवासी समुदाय | the forest-dwelling Kirata community |
| भिल्ल | भील समुदाय के लोग | people of the Bhil community |
| बनबासी | वन में रहने वाले | forest dwellers |
| मधु | शहद | honey |
| सुचि | शुद्ध | pure |
| सुंदर | सुंदर, उत्तम | fine; excellent |
| स्वादु | स्वादिष्ट | delicious |
| सुधा | अमृत | nectar |
| सी | के समान | like |
2 भरि भरि परन पुटीं रचि रुरी। कंद मूल फल अंकुर जूरी।।
English explanation
They fashion lovely leaf bowls, fill them with honey, and gather tubers, roots, fruits, and shoots.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरि | भरकर | filling |
| भरि | भरकर, बार-बार | filling each in turn |
| परन | पत्तों के | of leaves |
| पुटीं | दोने, पत्तों के पात्र | leaf bowls |
| रचि | बनाकर | having fashioned |
| रुरी | सुंदर | lovely |
| कंद | कंद | edible tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
| अंकुर | नए अंकुर | young shoots |
| जूरी | इकट्ठे करके | having gathered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 551
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 552
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।