अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि पितु क्रिया बेद जसि बरनी। भे पुनीत पातक तम तरनी।।
मूल पाठ
करि पितु क्रिया बेद जसि बरनी। भे पुनीत पातक तम तरनी।।
जासु नाम पावक अघ तूला। सुमिरत सकल सुमंगल मूला।।
स्रोत अभिलेख 2.248 · पुस्तक पृ. 550, 550
भावार्थ
मूल पाठ के बादवेदोंमें जैसा कहा गया है, उसीके अनुसार पिताकी क्रिया करके, पापरूपी अन्धकारके नष्ट करनेवाले सूर्यरूप श्रीरामचन्द्रजी शुद्ध हुए! जिनका नाम पापरूपी रूईके [तुरंत जला डालनेके] लिये अग्रि है; और जिनका स्मरणमात्र समस्त शुभ मङ्गलोंका मूल है,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 550 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करि पितु क्रिया बेद जसि बरनी। भे पुनीत पातक तम तरनी।।
English explanation
After performing his father's funeral rites as prescribed in the Vedas, Rama, who is like the sun dispelling the darkness of sin, became ritually pure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| पितु | पिता के | of his father |
| क्रिया | अंत्येष्टि-संबंधी कर्म | funeral rites |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| जसि | जिस प्रकार की | as |
| बरनी | वर्णित है | prescribed |
| भे | हुए | became |
| पुनीत | शुद्ध | ritually pure |
| पातक | पापरूपी | of sin |
| तम | अंधकार | darkness |
| तरनी | सूर्य | the sun |
2 जासु नाम पावक अघ तूला। सुमिरत सकल सुमंगल मूला।।
English explanation
His name is fire to the cotton of sin, and remembrance of him is the source of every blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका | whose |
| नाम | नाम | name |
| पावक | अग्नि | fire |
| अघ | पाप | sin |
| तूला | रूई | cotton |
| सुमिरत | स्मरण करना | remembering him |
| सकल | समस्त | all |
| सुमंगल | शुभ मंगलों का | of auspicious blessings |
| मूला | मूल कारण | the source |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.248
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 550
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 550, 550
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।