अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुद्ध सो भयउ साधु संमत अस। तीरथ आवाहन सुरसरि जस।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे [नित्य शुद्ध-बुद्ध] भगवान् श्रीरामजी शुद्ध हुए। साधुओंकी ऐसी सम्मति है कि उनका शुद्ध होना वैसे ही है जैसा तीर्थोंके आवाहनसे गङ्गाजी शुद्ध होती हैं! (गङ्गाजी तो स्वभावसे ही शुद्ध हैं, उनमें जिन तीर्थोंका आवाहन किया जाता है उलटे वे ही गङ्गाजीके सम्पर्कमें आनेसे शुद्ध हो जाते हैं। इसी प्रकार सच्चिदानन्दरूप श्रीराम तो नित्य शुद्ध हैं, उनके संसर्गसे कर्म ही शुद्ध हो गये।) जब शुद्ध हुए दो दिन बीत गये तब श्रीरामचन्द्रजी प्रीतिके साथ गुरुजीसे बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 550 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुद्ध सो भयउ साधु संमत अस। तीरथ आवाहन सुरसरि जस।।
सुद्ध भएँ दुइ बासर बीते। बोले गुर सन राम पिरीते।।
स्रोत अभिलेख 2.248 · पुस्तक पृ. 550, 550
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुद्ध सो भयउ साधु संमत अस। तीरथ आवाहन सुरसरि जस।।
English explanation
That Rama became pure is, in the judgment of the holy, like invoking sacred bathing places into the Ganges.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुद्ध | शुद्ध | pure |
| सो | वे राम | that same Rama |
| भयउ | हुए | became |
| साधु | साधुजनों को | to holy people |
| संमत | मान्य | accepted as |
| अस | ऐसा | such |
| तीरथ | पवित्र तीर्थों का | of sacred bathing places |
| आवाहन | आवाहन करना | invocation |
| सुरसरि | गंगा में | into the Ganges |
| जस | जैसा | like |
2 सुद्ध भएँ दुइ बासर बीते। बोले गुर सन राम पिरीते।।
English explanation
Two days passed after the ritual purification. Then Rama spoke lovingly to his teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुद्ध | शुद्ध | ritually pure |
| भएँ | होने पर | after becoming |
| दुइ | दो | two |
| बासर | दिन | days |
| बीते | बीत गए | passed |
| बोले | बोले | spoke |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | his teacher Vashishtha |
| सन | से | to |
| राम | श्रीराम | Rama |
| पिरीते | प्रेमपूर्वक | lovingly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.248
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 550
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 550, 550
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।