अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ लोग सब निपट दुखारी। कंद मूल फल अंबु अहारी।।
मूल पाठ
नाथ लोग सब निपट दुखारी। कंद मूल फल अंबु अहारी।।
सानुज भरतु सचिव सब माता। देखि मोहि पल जिमि जुग जाता।।
स्रोत अभिलेख 2.248 · पुस्तक पृ. 550, 550
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! सब लोग यहाँ अत्यन्त दुखी हो रहे हैं। कन्द, मूल, फल और जलका ही आहार करते हैं। भाई शत्रुघ्नसहित भरतको, मन्त्रियोंको और सब माताओंको देखकर मुझे एक-एक पल युगके समान बीत रहा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 550 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ लोग सब निपट दुखारी। कंद मूल फल अंबु अहारी।।
English explanation
Master, all the people are deeply distressed, subsisting on tubers, roots, fruit, and water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| लोग | लोग | the people |
| सब | सभी | all |
| निपट | अत्यंत | extremely |
| दुखारी | दुखी | distressed |
| कंद | कंद | tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruit |
| अंबु | जल | water |
| अहारी | पर निर्वाह करने वाले | subsisting on these |
2 सानुज भरतु सचिव सब माता। देखि मोहि पल जिमि जुग जाता।।
English explanation
Seeing Bharata with his younger brother, the ministers, and all the mothers, each moment passes for me like an age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama's brother |
| सचिव | मंत्रियों को | the ministers |
| सब | सभी | all |
| माता | माताओं को | the mothers |
| देखि | देखकर | seeing |
| मोहि | मुझे | for me |
| पल | एक क्षण | a moment |
| जिमि | जैसे | like |
| जुग | युग | an age |
| जाता | बीतता है | passes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.248
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 550
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 550, 550
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