अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करत प्रबेस मिटे दुख दावा। जनु जोगीं परमारथु पावा।।
मूल पाठ
करत प्रबेस मिटे दुख दावा। जनु जोगीं परमारथु पावा।।
देखे भरत लखन प्रभु आगे। पूँछे बचन कहत अनुरागे।।
स्रोत अभिलेख 2.239 · पुस्तक पृ. 542, 543
भावार्थ
मूल पाठ के बादआश्रममें प्रवेश करते ही भरतजीका दु:ख और दाह (जलन) मिट गया, मानो योगीको परमार्थ (परमतत्त्व) की प्राप्ति हो गयी हो। भरतजीने देखा कि लक्ष्मणजी प्रभुके आगे खड़े हैं और पूछे हुए वचन प्रेमपूर्वक कह रहे हैं (पूछी हुई बातका प्रेमपूर्वक उत्तर दे रहे हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 542 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करत प्रबेस मिटे दुख दावा। जनु जोगीं परमारथु पावा।।
English explanation
As Bharata entered, the wildfire of his sorrows died out, as though a yogi had attained the supreme spiritual goal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते ही | upon making |
| प्रबेस | प्रवेश | entry |
| मिटे | मिट गए; बुझ गए | vanished; were extinguished |
| दुख | दुःखों के | of sorrows |
| दावा | दावाग्नि के ताप | wildfire-like torment |
| जनु | मानो | as though |
| जोगीं | योगी ने | a yogi |
| परमारथु | परम आध्यात्मिक लक्ष्य | the supreme spiritual goal |
| पावा | प्राप्त कर लिया | had attained |
2 देखे भरत लखन प्रभु आगे। पूँछे बचन कहत अनुरागे।।
English explanation
Bharata saw Lakshmana before Lord Rama, lovingly answering what Rama had asked.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखे | देखा | saw |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| लखन | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama |
| आगे | सामने | before |
| पूँछे | पूछे हुए | asked |
| बचन | बातों के उत्तर | answers to the questions |
| कहत | कहते हुए | speaking |
| अनुरागे | प्रेमपूर्वक | lovingly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 542
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 542, 543
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।