अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा।।
मूल पाठ
सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा।।
भरत दीख प्रभु आश्रमु पावन। सकल सुमंगल सदनु सुहावन।।
स्रोत अभिलेख 2.239 · पुस्तक पृ. 542, 543
भावार्थ
मूल पाठ के बादसखा निषादराजसहित इस मनोहर जोड़ीको सघन वनकी आड़के कारण लक्ष्मणजी नहीं देख पाये। भरतजीने प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके समस्त सुमङ्गलोंके धाम और सुन्दर पवित्र आश्रमको देखा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 542 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा।।
English explanation
Lakshmana did not see the charming pair accompanied by their friend, because they were hidden by the dense forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | मित्र निषादराज गुह | their friend, Guha the Nishada chief |
| समेत | सहित | accompanied by |
| मनोहर | सुंदर | charming |
| जोटा | जोड़ा | pair |
| लखेउ | देख पाया | was able to see |
| न | नहीं | not |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| सघन | घना | dense |
| बन | वन | forest |
| ओटा | ओट के कारण | because of the concealing cover |
2 भरत दीख प्रभु आश्रमु पावन। सकल सुमंगल सदनु सुहावन।।
English explanation
Bharata saw Lord Rama’s sacred hermitage, a lovely abode of every blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत, राम के भाई को | to Bharata, Rama’s brother |
| दीख | दिखाई दिया | became visible |
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama’s |
| आश्रमु | आश्रम | hermitage |
| पावन | पवित्र | sacred |
| सकल | समस्त | all |
| सुमंगल | शुभ मंगलों का | auspicious blessings |
| सदनु | निवास | abode |
| सुहावन | सुंदर और मनभावन | lovely and pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 542
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 542, 543
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।