अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीने दो-चार स्वर्णविन्दु (सोनेके कण या तारे आदि जो सीताजीके गहने-कपड़ोंसे गिर पड़े थे) देखे तो उनको सीताजीके समान समझकर सिरपर रख लिया। उनके नेत्र [प्रेमाश्रुके] जलसे भरे हैं और हृदयमें ग्लानि भरी है। वे सखासे सुन्दर वाणीमें ये वचन बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 508 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।।
सजल बिलोचन हृदयँ गलानी। कहत सखा सन बचन सुबानी।।
स्रोत अभिलेख 2.199 · पुस्तक पृ. 508, 509
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।।
English explanation
He saw a few tiny particles of gold and placed them on his head, regarding them as equal to Sita herself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने के | of gold |
| बिंदु | छोटे कण | tiny particles |
| दुइ | दो | two |
| चारिक | चार-एक | four or so |
| देखे | देखे | saw |
| राखे | रखे | placed |
| सीस | सिर पर | on his head |
| सीय | सीता के | to Sita |
| सम | समान | equal |
| लेखे | मानकर | regarding as |
2 सजल बिलोचन हृदयँ गलानी। कहत सखा सन बचन सुबानी।।
English explanation
With tearful eyes and grief in his heart, Bharata spoke gentle words to his friend.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| गलानी | दुःख और संताप | grief and distress |
| कहत | कहते हैं | speaks |
| सखा | सखा, निषादराज गुह | his friend, Guha the Nishada chief |
| सन | से | to |
| बचन | वचन | words |
| सुबानी | मधुर वाणी में | in gentle speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.199
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 508
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 508, 509
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।