अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।।
मूल पाठ
कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।।
चरन रेख रज आँखिन्ह लाई। बनइ न कहत प्रीति अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.199 · पुस्तक पृ. 508, 509
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुशोंकी सुन्दर साथरी देखकर उसकी प्रदक्षिणा करके प्रणाम किया। श्रीरामचन्द्रजीके चरण- चिह्नोंकी रज आँखोंमें लगायी। [उस समयके] प्रेमकी अधिकता कहते नहीं बनती॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 508 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।।
English explanation
AI draft: Seeing the lovely bed of kusa grass, Bharata bowed and went around it in reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुस | कुश घास की | of kusa grass |
| साँथरीनिहारि | बिछौनी देखकर | seeing the bedding |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
| कीन्ह | किया | performed |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverential bow |
| प्रदच्छिन | परिक्रमा | reverential circumambulation |
| जाई | जाकर | having gone there |
2 चरन रेख रज आँखिन्ह लाई। बनइ न कहत प्रीति अधिकाई।।
English explanation
He touched the dust of the footprints to his eyes; the depth of his love cannot be expressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरणों की | of the feet |
| रेख | रेखाओं अथवा चिह्नों की | of the marks or footprints |
| रज | धूल | dust |
| आँखिन्ह | आँखों से | to the eyes |
| लाई | लगाई | applied |
| बनइ | संभव होता | is possible |
| न | नहीं | not |
| कहत | कहना | to express |
| प्रीति | प्रेम की | of love |
| अधिकाई | अधिकता, प्रगाढ़ता | abundance, intensity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.199
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 508
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 508, 509
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।