अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ए महि परहिं डासि कुस पाता। सुभग सेज कत सृजत बिधाता।।
मूल पाठ
ए महि परहिं डासि कुस पाता। सुभग सेज कत सृजत बिधाता।।
तरुबर बास इन्हहि बिधि दीन्हा। धवल धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.119 · पुस्तक पृ. 442, 442
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब ये कुश और पत्ते बिछाकर जमीनपर ही पड़े रहते हैं, तब विधाता सुन्दर सेज (पलंग और बिछौने) किसलिये बनाता है? विधाताने जब इनको बड़े-बड़े पेड़ों [के नीचे] का निवास दिया, तब उज्ज्वल महलोंको बना-बनाकर उसने व्यर्थ ही परिश्रम किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 442 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ए महि परहिं डासि कुस पाता। सुभग सेज कत सृजत बिधाता।।
English explanation
They lie on the ground after spreading sacred grass and leaves; why, then, does the Creator make beautiful beds?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये; राम, सीता और लक्ष्मण | these people—Rama, Sita, and Lakshmana |
| महि | धरती पर | on the ground |
| परहिं | लेटते हैं | lie down |
| डासि | बिछाकर | having spread out |
| कुस | कुश घास | sacred kusha grass |
| पाता | पत्ते | leaves |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सेज | सेजें; शय्याएँ | beds |
| कत | क्यों | why |
| सृजत | रचता है; बनाता है | creates; makes |
| बिधाता | विधाता | the Creator |
2 तरुबर बास इन्हहि बिधि दीन्हा। धवल धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा।।
English explanation
The Creator gave them shelter beneath trees; in repeatedly building bright palaces, he labored in vain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तरुबर | वृक्षों के नीचे | beneath trees |
| बास | निवास | dwelling; shelter |
| इन्हहि | इन्हें | to these people |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| दीन्हा | दिया | gave |
| धवल | उजले; श्वेत | bright; white |
| धाम | महल; भवन | palaces; mansions |
| रचि | रचकर | by building |
| रचि | बार-बार रचकर | building repeatedly |
| श्रमु | परिश्रम | labor; effort |
| कीन्हा | किया | performed; undertook |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 442
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 442, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।