अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब विधाताने इनको वनवास दिया है, तब उसने भोग-विलास व्यर्थ ही बनाये। जब ये बिना जूतेके (नंगे ही पैरों) रास्तेमें चल रहे हैं, तब विधाता अनेकों वाहन (सवारियाँ) व्यर्थ ही रचे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 442 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू।।
ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना। रचे बादि बिधि बाहन नाना।।
स्रोत अभिलेख 2.119 · पुस्तक पृ. 442, 442
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू।।
English explanation
If the Creator gave these very people forest exile, then he made pleasures and luxuries in vain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पे | ही; सचमुच | indeed; really |
| इन्हहि | इन्हीं को | to these very people |
| दीन्ह | दिया | gave |
| बनबासू | वनवास | forest exile |
| कीन्ह | बनाया | made |
| बादि | व्यर्थ | in vain |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| भोग | सुखों का उपभोग | enjoyments |
| बिलासू | विलास; ऐश्वर्यपूर्ण सुख | luxury; luxurious pleasure |
2 ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना। रचे बादि बिधि बाहन नाना।।
English explanation
These people travel the road without footwear; the Creator fashioned all kinds of vehicles in vain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये; राम, सीता और लक्ष्मण | these people—Rama, Sita, and Lakshmana |
| बिचरहिं | चलते हैं; विचरते हैं | travel; move about |
| मग | मार्ग पर | on the road |
| बिनु | बिना | without |
| पदत्राना | पादुकाओं; जूतों के | footwear; sandals |
| रचे | बनाए | fashioned |
| बादि | व्यर्थ | in vain |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| बाहन | वाहन | vehicles; conveyances |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 442
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 442, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।